अष्टांग योग से लाभ

अष्‍टांग योग से लाभ

·         इससे शरीर में रक्‍त संचार बढ़ता है और मस्तिष्‍क शांत रहता है

·         इससे क्षमता तथा लचीलापन बढ़ता है

·         जोड़ों को मजबूत बनाता है तथा उनकी चिकनाई को बढ़ाता है एवं मांसपेशियों को यथा आकार बनाए रखता है

·         वजन घटाने में मदद करता है

·         मानसिक स्‍पष्‍टता बढ़ाता है

·         आंतरिक अंगों से तनाव को बाहर निकालता है

हठ योग

·         यह भारतीय योग की सबसे प्राचीन विधा है। कुछ हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार भगवान शिव ने इस योग को सबसे पहले किया था। इस योग का संबंध नाड़ी से है।

·         हठ योग से होने वाले लाभ

·         शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाता है तथा टॉक्सिन्‍स को बाहर निकालता है

·         रीढ़ को सही रखता है

·         ग्रंथियों की कार्यप्रणाली को सही रखता है

·         तनाव दूर रखता है

आयंगर योग

इस योग का नाम इसके जनक बीकेएस आयंगर के नाम पर रखा गया है। यह हठ योग का ही एक प्रकार है। इसमें श्‍वास से जुड़े व्‍यायाम होते हैं।

आयंगर योग से होने वाले लाभ

·         रक्‍तचाप को घटाता है

·         तनाव कम करता है

·         गर्दन तथा पीठ का दर्द खत्‍म करता है

·         इम्‍यूनोडिफिएंसी में मददगार है

·         स्‍टेमिना, संतुलन तथा ध्‍यान केंद्रण बढ़ाता है

कुंडलिनी योग

इस योग से कुंडलिनी योग ऊर्जा को जागृत किया जाता है। कुंडलिनी ऊर्जा रीढ़ में होती है। उपनिषद में इस योग के बारे में विस्‍तार से समझाया गया है। इस प्रकार के नियमित योग से शरीर को लाभ होता है। इसमें प्राणायाम करते हुए मंत्रों के साथ आसन लगाए जाते हैं।

कुंडलिनी योग के लाभ

·         फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है

·         ब्‍लडस्‍ट्रीम को शुद्ध करता है

·         नर्वस सिस्‍टम को मजबूत करता है

·         शरीर, मस्तिष्‍क और आत्‍मा में संतुलन बढ़ाता है

पावर योग

पावर योग, अष्‍टांग योग का ही एक प्रकार है। पश्चिमी देशों से योग का विकसित प्रकार भारत आया, जिसे पावर योग कहा गया। इसे करने में अत्‍यधिक ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है। इससे शारीरिक क्षमता तो बढ़ती ही है साथ मानसिक शक्ति भी बढ़ती है।

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